किशोरावस्था के सबसे महत्वपूर्ण विकासात्मक कार्य क्या हैं?HealthPlanet

Posted on Sat 4th Mar 2023 : 17:04

किशोरावस्था के विकासात्मक कार्य तथा उनके अभिप्रेतार्थ :

13 से 20 वर्ष की आयु भारत में किशोरावस्था परिगणित की जाती है। इस अवस्था के प्रमुख विकासात्मक कार्य तथा इनके अभिप्रेत इस प्रकार हैं-

(1) काम भावना की परिपक्वता- किशोरावस्था में बालक-बालिकाओं की कामेन्द्रियों का पूर्ण विकास हो जाता है तथा उनमें काम भावना उच्च स्तर पर होती है। अत: वे भटक न जाएं या गलत संगत में न पड़ जाएं इस पर ध्यान देना अभिप्रेत है।

(2) अपराध की प्रवृत्ति- किशोरावस्था में नियमों की अवहेलना करने, बड़ों की अवज्ञा करने, शाला में अनुशासनहीनता करने तथा चोरी, मारपीट, कानूनों का उल्लंघन करने की प्रवृत्ति पाई जाती है। इनका कुविकास न हो इस हेतु माता पिता व शिक्षकों को ध्यान रखना चाहिए।

(3) संवेगात्मक अस्थिरता- किशोरावस्था में क्रोध, प्रेम, विद्वेष, काम भावना अस्थिर स्वरूप की होती है। किशोर स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाते । उनमें निर्णय में चंचलता होती है। अत: किशोरावस्था में किशोरों से उचित व्यवहार किया जाना चाहिए तथा उनकी भावनाओं की भी कद्र की जानी चाहिए। कठोर अनुशासन, डाँट-डपट उन्हें बर्दाश्त नहीं होती।

(4) आत्म प्रेम- डॉ. फ्रायड ने अपने आप से प्रेम की भावना को 'नारसिसिज्म' कहा है। किशोर-किशोरी स्वयं को आकर्षक बनाने में तथा अच्छे वस्त्र धारण करना, साज-श्रृंगार करने में लगे रहते हैं। वे वही कार्य करते हैं जो उन्हें अच्छा लगता है। कठोर अनुशासन व बंदिशें लगाने पर वे विद्रोही भी हो सकते हैं अतः अभिप्रेत यह है कि इस अवस्था में किशोरों से टेक्टफुली व्यवहार करना चाहिए।

(5) आत्म सम्मान की भावना- किशोरावस्था में आत्म सम्मान की भावना तीव्र होती है। यदि उनके आत्म सम्मान को ठोस पहुँचाई जाती है तो वे उद्विग्न हो उठते हैं। किशोरों को आत्म सम्मान की भावना का सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए ताकि उन्हें श्रेष्ठ खिलाड़ी, श्रेष्ठ वक्ता, श्रेष्ठ लेखक, श्रेष्ठ कवि, श्रेष्ठ नेता बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए ।

(6) समाज सेवा- किशोरावस्था में समाज चिंतन करने की भावना होती है अतः इसका उपयोग सामाजिक कार्यों, लोगों की मदद करने, गंदी बस्तियों में सुधार कार्य करने, प्रौढ़ शिक्षा देने, जैसे समाजोपयोगी उपयोगी कार्यों में किया जाना अपेक्षित है।

(7) कल्पना बाहुल्य- किशोरावस्था में दैनिक जीवन में ही कल्पनाशीलता की भावना किशोरों-किशोरियों में पाई जाती है। चित्रकला, पेंटिंग, साहित्य रचना संगीत आदि की ओर उन्मुख किशोरों को ऐसे अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि वे अपनी कल्पनाशीलता का रचनात्मक उपयोग सृजनात्मक कार्यों में कर सकें।

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